भारतीय इतिहास में मराठा साम्राज्य ( maratha empire in hindi ) का उदय एक ऐसी घटना थी जिसने देश की राजनीतिक परिस्थितियों को बदलकर रख दिया. इस साम्राज्य की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने रखी, जिन्होंने स्वराज्य के विचार को वास्तविकता में बदलने का साहस दिखाया. मराठा साम्राज्य ( maratha empire in hindi ) केवल एक राज्य नहीं था, बल्कि यह स्वतंत्रता, सुशासन और जनकल्याण की भावना का प्रतीक था.
सत्रहवीं शताब्दी में जब मुगल साम्राज्य अपनी शक्ति के चरम पर था, तब शिवाजी महाराज ने दक्कन क्षेत्र में एक ऐसे राज्य की स्थापना की जो आगे चलकर भारत की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में से एक बना. मराठा साम्राज्य का इतिहास वीरता, संगठन क्षमता, युद्ध कौशल और प्रशासनिक उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है.
मराठा साम्राज्य की पृष्ठभूमि
17 वी शताब्दी के प्रारंभ में दक्कन क्षेत्र कई शक्तियों के बीच बंटा हुआ था. बीजापुर, गोलकुंडा और मुगल साम्राज्य यहां अपना प्रभाव बढ़ाने में लगे हुए थे. आम जनता लगातार युद्धों, भारी करों और राजनीतिक अस्थिरता से परेशान थी.
इसी समय महाराष्ट्र क्षेत्र में मराठा समुदाय धीरे-धीरे एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा था. स्थानीय लोगों में स्वतंत्र शासन की इच्छा बढ़ रही थी. इस परिस्थिति ने एक ऐसे नेता की आवश्यकता पैदा की जो जनता को संगठित कर सके और विदेशी नियंत्रण से मुक्ति दिला सके.
यहीं से छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठा शक्ति का उदय शुरू हुआ.
छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रारंभिक जीवन
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था. उनके पिता शाहजी भोंसले दक्कन के प्रसिद्ध सेनानायक थे जबकि माता जीजाबाई धार्मिक, साहसी और दूरदर्शी महिला थीं.

जीजाबाई ने शिवाजी को बचपन से ही भारतीय संस्कृति, धर्म, न्याय और वीरता के आदर्शों से परिचित कराया था. रामायण और महाभारत की कहानियों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डाला था.
कम उम्र में ही शिवाजी ने समझ लिया था कि जनता को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने के लिए स्वतंत्र शासन आवश्यक है. यही विचार आगे चलकर “हिंदवी स्वराज्य” की अवधारणा बना.
मराठा साम्राज्य की स्थापना
शिवाजी महाराज ने युवावस्था में ही किलों और रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया था. 1646 में तोरणा दुर्ग पर अधिकार उनकी पहली बड़ी सफलता मानी जाती है।
इसके बाद उन्होंने राजगढ़, पुरंदर, कोंडाणा और कई अन्य महत्वपूर्ण किलों पर नियंत्रण स्थापित किया. इन किलों ने मराठा साम्राज्य को मजबूत सैन्य आधार प्रदान किया था.
शिवाजी का उद्देश्य केवल क्षेत्र विस्तार नहीं था, बल्कि एक ऐसा राज्य बनाना था जिसमें जनता को न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिले. इसी कारण मराठा आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ था.
शिवाजी महाराज की सैन्य रणनीति और युद्ध नीति
मराठा साम्राज्य ( maratha samrajya in hindi ) की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसकी अनोखी सैन्य रणनीति थी. शिवाजी महाराज ने “गनिमी कावा” अर्थात गुरिल्ला युद्ध प्रणाली को प्रभावी रूप से अपनाया.
इस पद्धति में सेना छोटे-छोटे समूहों में कार्य करती थी, अचानक हमला करती थी और शत्रु को भारी नुकसान पहुंचाकर सुरक्षित स्थान पर लौट जाती थी.
पश्चिमी घाट की पर्वतीय भू-आकृति और किलों का कुशल उपयोग मराठा सेना की सबसे बड़ी ताकत थी. यही कारण था कि अपेक्षाकृत छोटी सेना होने के बावजूद मराठे बड़ी-बड़ी शक्तियों को चुनौती देने में सफल रहे.
बीजापुर और मुगलों के साथ संघर्ष
मराठा शक्ति के बढ़ते प्रभाव से बीजापुर और मुगल दोनों चिंतित थे. अफजल खान को शिवाजी का दमन करने के लिए भेजा गया, लेकिन प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक घटना में शिवाजी महाराज ने उसकी योजना को विफल कर दिया था.
इसके बाद मुगल साम्राज्य और मराठों के बीच संघर्ष तेज हो गया था. औरंगजेब ने मराठा शक्ति को समाप्त करने के लिए अनेक अभियान चलाए, लेकिन शिवाजी की रणनीति और जनता के समर्थन के कारण उसे पूर्ण सफलता नहीं मिली थी.
1666 में आगरा से शिवाजी का साहसिक पलायन भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक माना जाता है.
छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक
6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ, इस समारोह के बाद उन्हें “छत्रपति” की उपाधि प्राप्त हुई.
राज्याभिषेक ने मराठा साम्राज्य को एक वैध और स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया था. यह घटना भारतीय इतिहास में स्वराज्य की औपचारिक घोषणा के रूप में भी देखी जाती है.
मराठा प्रशासन और अष्टप्रधान परिषद
शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं बल्कि कुशल प्रशासक भी थे।
उन्होंने शासन संचालन के लिए “अष्टप्रधान परिषद” का गठन किया. इसमें आठ प्रमुख मंत्री शामिल थे जो विभिन्न विभागों का संचालन करते थे.
उनकी प्रशासनिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं थीं—
● किसानों की सुरक्षा
● न्यायपूर्ण कर व्यवस्था
● भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
● धार्मिक सहिष्णुता
● प्रभावी सैन्य संगठन
● स्थानीय प्रशासन को महत्व
इन सुधारों ने मराठा साम्राज्य को स्थिर और मजबूत बनाया
मराठा नौसेना का विकास
शिवाजी महाराज ने समुद्री सुरक्षा के महत्व को समझते हुए एक शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया.
उन्होंने सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे समुद्री किलों का निर्माण कराया. इससे पश्चिमी तट पर विदेशी शक्तियों और समुद्री लुटेरों के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद मिली.
भारतीय इतिहास में शिवाजी को संगठित नौसैनिक शक्ति विकसित करने वाले प्रारंभिक शासकों में गिना जाता है।
शिवाजी महाराज के बाद मराठा साम्राज्य
1680 में शिवाजी महाराज के निधन के बाद उनके पुत्र संभाजी महाराज ने शासन संभाला था.
हालांकि मराठों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका संघर्ष जारी रहा. बाद में राजाराम और महारानी ताराबाई ने भी मराठा शक्ति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
अठारहवीं शताब्दी में पेशवाओं के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य का विस्तार तेजी से हुआ.
पेशवा काल और मराठा साम्राज्य का स्वर्ण युग
पेशवा मराठा शासन के प्रमुख प्रशासक थे, पेशवा बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य ने अभूतपूर्व विस्तार किया.
मराठा प्रभाव महाराष्ट्र से निकलकर गुजरात, मालवा, बुंदेलखंड, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली तक पहुंच गया.
इस समय मराठा साम्राज्य भारत की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बन चुका था.
पानीपत का तीसरा युद्ध और मराठा साम्राज्य
1761 में मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ था.
यह युद्ध भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक माना जाता है. युद्ध में मराठों को भारी क्षति उठानी पड़ी, जिससे उनके विस्तार की गति धीमी हो गई.
हालांकि इस पराजय के बावजूद मराठा शक्ति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई और उन्होंने पुनः अपनी स्थिति मजबूत कर ली.
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मराठा साम्राज्य का पतन
उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में अपनी शक्ति बढ़ा रही थी.
मराठों और अंग्रेजों के बीच तीन बड़े युद्ध हुए जिन्हें आंग्ल-मराठा युद्ध कहा जाता है।
1818 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद मराठा साम्राज्य का अंत हो गया और अंग्रेजों का भारत पर प्रभुत्व स्थापित हो गया।

भारतीय इतिहास में मराठा साम्राज्य का महत्व
मराठा साम्राज्य ने भारतीय इतिहास में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिए.
● मुगल साम्राज्य की शक्ति को चुनौती दी.
● स्वराज्य और आत्मनिर्भर शासन की अवधारणा को मजबूत किया.
● प्रभावी प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत किया.
● भारतीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा की।
● भविष्य के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा दी।
maratha empire questions and answers in hindi
Q 1. शिवाजी का जन्म कब हुआ तथा कब उन्होंने “छत्रपति” की उपाधि धारण की?
Ans. 1627, 1674
Q 2. शिवाजी का जन्म कहाँ हुआ था?
Ans. शिवनेर के दुर्ग में
Q 3. शिवाजी का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?
Ans. रायगढ़
( RRB 2003; UPPCS 2016 )
Q 4. शिवाजी के राजनीतिक गुरु एवं संरक्षक कौन थे?
Ans. दादाजी कोण्डदेव
Q 5. किसके शासनकाल में मराठा प्रमुख शम्भाजी की हत्या कर दी गई थी?
Ans. औरंगजेब
( RRB 2005 )
Q 6. निम्नलिखित यूरोपीय शक्तियों में किसने शिवाजी को तोपें प्रदान की?
Ans. अंग्रेज
( SSC 2000 )
Q 7. शिवाजी के साम्राज्य की राजधानी कहाँ थी?
Ans. रायगढ़
( RRB 2003; BPSC 2015 )
Q 8. पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761 ई.) किनके बीच हुई थी?
Ans. पेशवा बाजीराव II और अहमदशाह अब्दाली
( RRB 2003, 2004, 2005; CDS 2000; Utt. PSC 2002 )
Q 9. शिवाजी सर्वाधिक प्रभावित थे —-
Ans. जीजाबाई से
( RRB 2003 )
Q 10. “अष्टप्रधान” मंत्रिपरिषद किस शासक के शासनकाल में थी?
Ans. शिवाजी
( RRB 2003 )
Q 11. शिवाजी को कर्मदर्शन का उपदेश देनेवाले एवं शिवाजी के पुत्र शम्भाजी को मराठों को संगठित करने और महाराष्ट्र धर्म को प्रचारित करने का उपदेश देनेवाले मराठा संत थे:
Ans. समर्थ रामदास
Q 12. शिवाजी मुगलों की कैद से भागने के समय कौन से नगर में कैद थे?
Ans. आगरा
( MPPSC 2005 )
Q 13. शिवाजी ने, कब “छत्रपति” की उपाधि धारण कर अपना राज्याभिषेक करवाया?
Ans. जून, 1674
Q 14. मराठों के उत्कर्ष के महत्त्वपूर्ण कारण क्या थे (1. महाराष्ट्र की भौगोलिक स्थिति, 2. औरंगजेब की हिन्दू विरोधी नीति, 3. मराठा धर्म सुधारकों का प्रभाव, 5. शिवाजी का जुझारु व्यक्तित्व)?
Ans. 1, 2, 3, 5
Q 15. मराठों ने सर्वप्रथम किसके अधीन कार्य कर प्रशासनिक अनुभव प्राप्त किया?
Ans. देवगिरि के यादवों के अधीन
Q 16. मराठों के “बर्गीगिरि” (गुरिल्ला युद्ध प्रणाली/ छापामार युद्ध प्रणाली) गुण का सबसे पहले और सबसे अधिक उपयोग किसने किया?
Ans. मलिक अम्बर ने
Q 17. निम्नलिखित में से गुरिल्ला युद्ध का पथ-प्रदर्शक कौन था?
Ans. शिवाजी
( SSC 2002 )
Q 18. शिवाजी के प्रशासन में “पेशवा” कहा जाता था:
Ans. प्रधानमंत्री को
( SSC 2002, 2004 )
Q 19. “चौथ” क्या था?
Ans. पड़ोसी राज्यों पर शिवाजी द्वारा लगाया गया भूमि कर
( SSC 2001 )
Q 20. “मराठा राज्य का दूसरा संस्थापक” किसे कहा जाता है?
Ans. बालाजी विश्वनाथ
( SSC 2001 )
maratha empire in hindi 2026
Q 21. शिवाजी ने मुगलों को किस संधि के द्वारा किलों को हस्तांतरित किया?
Ans. पुरंदर की संधि
( SSC 1999; NDA 2000 )
Q 22. “दास बोध” के रचनाकार है —
Ans. समर्थ रामदास
Q 23. लार्ड वेलेस्ली की सहायक संधि (Subsidiary alliance) को स्वीकार करनेवाला पहला मराठा सरदार था-
Ans. पेशवा बाजीराव II
( BPSC 1996 )
Q 24. “सरंजामी” प्रथा किससे संबंधित थी?
Ans. मराठा भूराजस्व व्यवस्था
( BPSC 1994 )
Q 25. वह कौन सेनानायक था जिसे बीजापुर के सुल्तान ने 1659 में शिवाजी को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने के लिए भेजा था?
Ans. अफजल खाँ
( UPPCS 1999 )

Q 26. ग्वालियर राज्य की स्थापना किसने की थी?
Ans. जीवाजीराव सिंधिया
( MPPSC 2005 )
Q 27. शिवाजी को “पहाड़ी चूहा” व “साहसी डाकू” की संज्ञा किसने दी?
Ans. औरंगजेब
Q 28. एक इतिहासकार ने पानीपत की तीसरी लड़ाई को स्वयं देखा। वह कौन था?
Ans. काशीराज पंडित
( CPSC 2003 )
Q 29. शिवाजी द्वारा दुर्गों पर किये गये अधिकार का सही क्रम है:
Ans. सिंहगढ़/ कोण्डाना – तोरण – पुरन्दर – रायगढ़
Q 30. शिवाजी औरंगजेब के आगरा दरबार में कब उपस्थित हुए?
Ans. 1666 ई. में
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Q 31. शम्भाजी के बाद मराठा शासन को निम्नलिखित में किसने सरल और कारगर बनाया?
Ans. बालाजी विश्वनाथ
( UPSC 2000 )
Q 32. शिवाजी के “अष्टप्रधान” का जो सदस्य विदेशी मामलों की देख-रेख करता था, वह था:
Ans. सुमन्त
( SSC 1999 )
Q 33. शिवाजी को “राजा” की उपाधि किसने प्रदान की थी?
Ans. औरंगजेब
Q 34. काशी के किस प्रसिद्ध विद्वान् ने शिवाजी का राज्याभिषेक करवाया?
Ans. श्री विश्वेश्वर जी गंगाभट्ट
Q 35. अपने राज्याभिषेक उपलक्ष्य में शिवाजी ने क्या नहीं किया?
Ans. सभी प्रकार के कर हटा लिए
Q 36. शिवाजी का अंतिम सैन्य अभियान था:
Ans. कर्नाटक अभियान
Q 37. शिवाजी के समय में “अष्टप्रधान” कहा जाता था:
Ans. आठ मंत्रियों की एक परिषद को
Q 38. मराठा सचिवालय कहलाता था-
Ans. फाद
Q 39. “सर-ए-नौबत” का अर्थ था:
Ans. सेनापति
Q 40. शिवाजी की भूराजस्व व्यवस्था के संदर्भ में क्या सत्य है?
Ans. उपर्युक्त में सभी (काठी का प्रयोग, लगान दर 33% से 40% करना, रैय्यतवाड़ी व्यवस्था अपनाना)
शिवाजी महाराज प्रश्न उत्तर 2026
Q 41. “चौथ” मुगल क्षेत्रों की भूमि एवं पड़ोसी राज्यों की आय का चौथा हिस्सा (25 %) होता था। इस कर को किस वंश के शासकों ने वसूला?
Ans. मराठा वंश
Q 42. “सरदेशमुखी” की वसूली शिवाजी इस आधार पर करते थे कि वे महाराष्ट्र के पुश्तैनी “सरदेशमुख” हैं। “सरदेशमुखी” राजस्व का कितना प्रतिशत होता था?
Ans. 10 %
Q 43. निम्न में से किसने पुर्तगालियों से सालसेट एवं बेसीन के द्वीपों को छीना?
Ans. बालाजी विश्वनाथ
Q 44. किस पेशवा ने मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला को मराठा शक्ति की एक झलक दिखाने के लिए 1737 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया और मुहम्मदशाह को मालवा की सूबेदारी पेशवा के नाम करने के लिए विवश किया?
Ans. बाजीराव I
Q 45. किसके समय में मराठा शक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंची तथा साथ ही मराठा शक्ति का पतन भी आरंभ हुआ?
Ans. बालाजी बाजीराव
Q 46. पेशवा बाजीराव एवं छत्रपति रामराजा के बीच हुए संगोला संधि (1750 ई.) के संबंध में क्या सत्य है?
Ans. उपर्युक्त में से सभी
Q 47. किस मराठा सरदार ने पूर्व में बंगाल-बिहार उड़ीसा में 1741-51 के बीच मराठा शक्ति का प्रसार किया और बंगाल के नवाब अलीवर्दी खां को संधि करने पर विवश किया?
Ans. रघुजी भोंसले
Q 48. किस मराठा सरदार ने 1758-59 में पंजाब विजय किया?
Ans. रघुनाथ राव
Q 49. किसने दिल्ली में मुगल बादशाह की सहायता के लिए रखे गये अपनी सेना का वेतन चुकाने के लिए दिल्ली के दीवान-ए-आम की छत से चांदी निकलवा ली?
Ans. सदाशिव राव भाऊ
Q 50. “दो मोती जल में घुल गए, सोने की 27 मोहरें खोई गई, चांदी और तांबे की जो हानि हुई उसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता” – यह किससे संबंधित है?
Ans. पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठा सेना के विनाश से
Q 51. पानीपत के तृतीय युद्ध में मारे जानेवाले दो महत्त्वपूर्ण सैन्य सरदार थे:
Ans. विश्वास राव एवं सदाशिव राव भाऊ
Q 52. किस इतिहासकार ने कहा, “पानीपत का तृतीय युद्ध एक निर्णायक युद्ध था मराठा सेना की मुकुटमणि वहीं गिर गई थी और इस युद्ध के पश्चात् मराठों के अखिल भारतीय साम्राज्य के स्वप्न नष्ट हो गये।”
Ans. जदुनाथ सरकार
Q 53. शिवाजी के बाद किसने गुरिल्ला युद्ध का संचालन किया?
Ans. बाजीराव I
Q 54. शिवाजी की मृत्यु के पश्चात उत्तराधिकार के लिए किन के बीच लड़ाई हुई?
Ans. राजाराम और संभाजी
( CDS 2015 )
Q 55. किस मराठा सरदार ने सेना का गठन यूरोपीय ढंग से किया?
Ans. महदाजी सिंधिया
मराठा साम्राज्य से संबंधित प्रश्न pdf
Q 56. किसने कहा है कि “मराठों का उदय आकस्मिक अग्निकांड की भांति” हुआ?
Ans. ग्रान्ट डफ
Q 57. 1775-82 के प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का निम्नलिखित में कौन-सा एक परिणाम था?
Ans. किसी भी पक्ष की जीत नहीं हुई।
( CDS 2010 )
Q 58. अहमदशाह अब्दाली के भारत पर आक्रमण और पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ने का तात्कालिक कारण क्या था?
Ans. वह मराठों द्वारा लाहौर से अपने वायसराव तैमूरशाह निष्कासन का बदला लेना चाहता था
( UPSC 2010 )
Q 59. औरंगजेब की मृत्यु के समय मराठा नेतृत्व किसके हाथों में था?
Ans. ताराबाई
( UPPCS 2012 )
निष्कर्ष
छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य का इतिहास भारतीय गौरव, साहस और संगठन क्षमता का अद्भुत उदाहरण है. शिवाजी महाराज ने जिस स्वराज्य की नींव रखी, वह आगे चलकर पूरे भारत में एक शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में विकसित हुआ. मराठा साम्राज्य ने न केवल राजनीतिक इतिहास को प्रभावित किया बल्कि प्रशासन, सैन्य रणनीति और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में भी अमिट योगदान दिया.
आज भी शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य भारतीयों के लिए प्रेरणा, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक बने हुए हैं.
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