Success Story

Varun Baranwal IAS Success Story Interview

Varun Baranwal IAS Success Story Interview यूपीएससी एग्जाम IAS rank: वरुण बरनवाल कुछ सालो पहले तक बहुत ही सामान्य सा नाम था और अगर हम यह कहे सामान्य नहीं बल्कि ऐसा नाम था जिसके पास अपना कहने को कुछ नहीं था लेकिन आज उस नाम को हर कोई जानता है इसलिए ही कहा जाता है की अगर इन्सान के हौसले बुलंद हो तो वो कठिन हालात मे भी अपने सपनो को पूरा कर सकता है ।

हम बात कर रहे है एक ऐसे आईएएस अधिकारी की है जिन्होंने कठिन व् विपरीत परिस्थियों मे दुनिया की सभी तकलीफो से लड़ते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर IAS के एग्जाम मे भी सफलता हासिल की । इन जुझारू इन्सान का नाम है वरुण बरनवाल | इन्होने अपने आत्मविश्वास व् हौसले के दम पर 2013 के यूपीएससी एग्जाम मे 32वी रैंकिंग हासिल की ।

Varun Baranwal IAS Success Story Interview

Varun Baranwal IAS Success Story Interview

अपने जीवन का एक किस्सा याद करते हुए वे बताते है की “जब मैंने 10वी कक्षा पास की तब मेरा एक दोस्त मुझे मुबारक देते हुए बोला अब आगे जीवन मे क्या करना चाहते हो ।

ये वो प्र्शन था जिसको सुनकर मे दुखी और निराश हो गया था क्योकि मेरे पास कोई उत्तर नहीं था और फिर पढ़ाई छोड़ कर घर चलने के लिए काम करने की सोची लेकिन जब घर गया तो माँ ने मेरी मन की बात समझ ली और कहा तू पढ़ाई कर और मैं दुकान संभाल लूंगी |

पूरे परिवार के सदस्यों ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा आप आगे की पढ़ाई जारी रखो लेकिन आगे की पढ़ाई का खर्चा 10000 तक था जो की हमारे परिवार के पास नहीं था इसलिए मैंने पढ़ाई छोड़ कर दुकान पर काम करने का सोच लिया |

एक दिन जब मे दुकान पर काम कर रहा था तो मेरे पिताजी को जानने वाले डॉ कम्पली ने मुझे देखा और पूछा की तुम यहाँ क्या कर रहे हो और मेरी परेशानी जानने के बाद बोले – तुम 11वी कक्षा मे एडमिशन लो और इसके लिए फीस मे दूंगा”|

यही वो पल था जब वरुण के सपनो को हवा दी और नया आत्मविश्वास पैदा किया । अब वो पढ़ाई के साथ घर चलाने के लिए दुकान पर भी काम कर रहे थे लेकिन उनको खुद पर पूरा विश्वास था और उन्होंने कभी भी निराशा मे पढ़ाई बंद नहीं की । पूरे दिन मे जब भी काम के बिच मे थोड़ा सा समय मिलता तो अपनी किताब पढ़ लेते ।

साल 2008 मे वरुण ने 12वी कक्षा साइंस सब्जेक्ट से अच्छे नंबर से पास की | वरुण बरनवाल महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर बोइसार के रहने वाले है । वे एक बेहद गरीब परिवार मे जन्मे लेकिन शुरू से ही होनहार छात्र थे | उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा और जिया है ।

जब वो छोटे थे तो उनके पिता घर चलाने के लिए एक साईकिल पंचर की दुकान चलाते थे और उसी से पुरे घर का खर्च चलता था । घर मे बहुत गरीबी थी लेकिन उसके बावजूद उनके माता पिता ने अपने बच्चो को पढ़ाना जारी रखा लेकिन समय ने हमेशा उनकी परीक्षा ली और बाधाये भी आयी । 10वी के एग्जाम के समय उनके पिताजी बीमार हो गए और उन्होंने पूरी परीक्षा के समय अपने पिताजी की देखभाल के साथ अपने एग्जाम की तैयारी भी की |

21 मार्च 2006 को उनकी 10वी की परीक्षा खत्म हुई और 24 मार्च को उनके पिताजी की मृत्यु हो गयी । क्योकि पांच भाई बहनो मे वरुण अपने घर के सबसे बड़े बेटे है इसलिए पिता की मृत्यु के बाद घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी वरुण ने संभाली | कुछ समय बाद उनका 10वी का रिजल्ट आया और उन्होंने पूरे शहर मे दूसरा स्थान हासिल किया ।

अब जब इंजीनियरिंग मे एडमिशन के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तब उनके जानने वाले सुकुमार भैया, परिवार और कुछ लोगो ने पैसे इकट्ठा करके MIT कॉलेज, पुणे मे Electronics and Telecommunications ब्रांच मे इंजीनियरिंग मे एडमिशन दिलाया । वरुण ने इंजीनियरिंग के पहले टर्म एग्जाम मे टॉप किया जिससे उनको आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृती मिल गयी ।

लेकिन सेकंड ईयर का किस्सा याद करते हुए वरुण बताते है की “छात्रवृती का प्रोसेस कठिन व् कॉम्प्लिकेटेड था इसलिए पूरा सेकंड ईयर लग गया मुझे छात्रवृती लेने मे ।

इस बिच, मैं अपने कुछ दोस्तों को उनकी स्टडी मे हेल्प करता और जरूरत पड़ने पर पढ़ाता भी था । इसका परिणाम ये हुआ की मेरे कॉलेज के मित्रो और टीचर्स ने मिलकर मेरी आर्थिक सहायता की व् फीस जमा करवाई जिससे मैं सेकंड ईयर का एग्जाम दे सकू “ । आगे उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्चा निकालने मे छात्रवृती बहुत मददगार साबित हुई । इस बिच अपने खर्चा निकलने के लिए उन्होंने टूशन्स भी पढ़ाया ।

सामाजिक कार्य – वरुण पढ़ाई मे मेधावी छात्र तो थे ही उसके साथ साथ उनको सामाजिक कार्यो मे भी बहुत रुझान था इसलिए ही उन्होंने 2011 क अन्ना आंदोलन मे भाग लिया । इसके साथ साथ उनको जब जहाँ जिसकी सहायता करने का मौका मिलता वो नहीं चूकते थे ।इस प्रकार आर्थिक परेशानियों से जूझते हुई उन्होंने 2012 इंजीनियरिंग पूरी की ।

इसी दौरान MIT मे कैंपस प्लेस्मेंट मे उनको MNC कंपनी Deloitte का जॉब ऑफर मिला । ये वो समय था जहाँ पर उनकी सारी परेशानियों का अंत होना था और मंज़िल साफ़ दिख रही थी। लेकिन उनको तो कुछ और ही करना था । उनको प्राइवेट जॉब करके केवल अपनी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं करनी थी बल्कि सामाजिक समस्याओ को दूर करने की ठानी हुई थी ।

इसी सोच के साथ उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने की सोची और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना शुरू किया। जब उनकी माँ को पता चला की वो प्राइवेट कंपनी का ऑफर नहीं ले रहे तो उनकी माँ बहुत नाराज हुई और 3 महीनो तक उनसे बात नहीं की । लेकिन जब 2013 मे यूपीएससी मे 32वी रैंक आयी तो सबसे ज्यादा खुश मेरी माँ ही थी |

वरुण बरनवाल का कहना है की अगर मेरी माँ ने मुझे सपोर्ट नहीं क्या होता तो शयद आज मे एक साईकल मैकेनिक ही होता लेकिन आज मैं जिस मुकाम का सपना देखा करता था वहां पर पहुंच कर बहुत खुश हूँ ” । उनका कहना है की परिवार के सदस्यों के अलावा बाहर के बहुत से लोगो का उनको सपोर्ट मिला।

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